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'हरियाणा बिजली संकट टला: सीएम सैनी और ऊर्जा मंत्री विज से बातचीत के बाद कर्मचारियों ने वापस ली हड़ताल, निजी कंपनियों की एंट्री पर रोक का आश्वासन'

हरियाणा बिजली संकट टला: सीएम सैनी और ऊर्जा मंत्री विज से बातचीत के बाद कर्मचारियों ने वापस ली हड़ताल, निजी कंपनियों की एंट्री पर रोक का आश्वासन

हरियाणा मेंपिछले कुछ दिनों से गहराया बिजली संकट आखिरकार समाप्त हो गया है। मुख्यमंत्री नायबसिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ हुई सकारात्मक बातचीत के बाद, राज्य के बिजली विभाग के कर्मचारियों नेशुक्रवार को अपनी तीन दिवसीय हड़ताल वापस लेने की घोषणा कर दी है। सरकार द्वाराकर्मचारियों की मांगें माने जाने और निजी कंपनियों को बिजली वितरण का लाइसेंस दिएजाने के फैसले को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद जनजीवन के सामान्य होनेकी उम्मीद बंध गई है।

कर्मचारियों नेबताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि राज्य के बिजली क्षेत्र मेंकिसी निजी कंपनी को आने नहीं दिया जाएगा और समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस रद्द करदिए जाएंगे। लंबित मुद्दों पर चर्चा के लिए अगली बैठक 3 नवंबर को तय की गई है। इस बीच, हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि HREC(हरियाणा विद्युत नियामकआयोग) ने एक निजी कंपनी को मौका दिया था, जबकि सरकार की ओर से इसके लिए कोई आवेदन नहीं मांगे गए थे।

 

उन्होंने कहा,"जिस दिन यह फैसला आया,उसी दिन से हमारे बिजलीविभाग के कर्मचारियों ने इसका विरोध किया और हमने भी इसका विरोध किया। आज मैंनेमुख्य यूनियन नेताओं से बात की और उन्हें समझाया कि सरकार के पास धारा 108 के तहत इसे रद्द करने का अधिकार है। हमने इसेतुरंत रद्द करने की कार्रवाई के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं।"

 

हम कर्मचारीयूनियन के साथ हैं: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

हरियाणा केमुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हाल ही में जब HREC ने आदेश जारी किया, तो हमारे मंत्री ने साफ कर दिया था कि हम इसकेखिलाफ हैं—पूरी सरकार इसकेविरोध में है। उन्होंने कहा, "हम कर्मचारी यूनियन के साथ खड़े हैं।"

 

उन्होंने आगे कहा,"आज बहुत अच्छे माहौल मेंबातचीत हुई। धारा 108 के तहत, हमने HERC को इस मामले की समीक्षा करने के लिए अधिकृत किया है। हमनेयूनियन के पदाधिकारियों के साथ बैठक की और अब उन्होंने हड़ताल वापस लेने की घोषणाकी है।"

 

अनिल विज का कहनाहै कि सरकार यूनियन के साथ बातचीत करेगी

इससे पहले दिनमें, ऊर्जा मंत्रीअनिल विज ने कहा था कि सरकार यूनियन के साथ बातचीत करेगी और उन्हें उम्मीद थी किकुछ ही घंटों में यह आंदोलन खत्म हो जाएगा। 'हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्षमोर्चा' ने तीन दिन कीहड़ताल का आह्वान किया था। यह हड़ताल तब शुरू हुई जब राज्य के बिजली नियामक,HERC ने 19 अक्टूबर को 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' को दो जिलों में बिजली आपूर्ति करने का लाइसेंस दे दिया,जबकि वहां पहले से हीसरकारी बिजली कंपनियां (डिस्कॉम) काम कर रही थीं। गुरुवार को बिजली विभाग के लगभग 40,000 कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी, जिसका असर पूरे राज्य में देखने को मिला।गुरुग्राम और चंडीगढ़ जैसे शहरों में बिजली आपूर्ति, पानी की सेवाएं, औद्योगिक उत्पादन और कई जरूरी कामकाज बुरी तरह प्रभावितहुए।

 

इससे पहले दिनमें, अनिल विज ने कहाकि सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों को बातचीत के लिए बुलाया है और उन्हें उम्मीद हैकि यह हड़ताल "कुछ ही घंटों" में खत्म हो जाएगी। कर्मचारियों से काम परलौटने की अपील करते हुए विज ने कहा, "हम सभी विकल्पों पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। इसमें 'बिजली अधिनियम 2003' की धारा 108 के तहत कार्रवाई करना भी शामिल है।"

 

हड़ताल के कारणकई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई

गौरतलब है कि इसहड़ताल की वजह से कई रिहायशी और औद्योगिक इलाकों में बिजली की आपूर्ति ठप हो गईहै। कुछ जगहों पर तो लोगों ने लंबे समय तक बिजली न आने के विरोध में सड़क जाम करदी।

 

वहीं, गुरुग्राम के कई हिस्सों में 30 घंटे से ज्यादा समय से बिजली नहीं है, जिससे वहां रहने वाले लोगों का जीवन बेहदमुश्किल हो गया है। अशोक विहार फेज-3, दौलताबाद फ्लाईओवर, खांडसा रोड, राजेंद्र पार्क और फर्रुखनगर जैसे प्रमुख इलाकों में देर रात सैकड़ों लोग सड़कोंपर उतर आए।

 

गुस्साए लोगों नेमुख्य सड़कें जाम कर दीं और सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। सूचना मिलनेपर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन हालात कोकाबू में करने और जाम खुलवाने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी। सड़कों पर कईकिलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे देर रात घरलौट रहे कामकाजी लोगों और जरूरी सेवाएं देने वाले वाहनों को भारी परेशानी का सामनाकरना पड़ा।




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